Thursday, February 11, 2021
February 13, 2010 के आखर कलश ब्लॉग से उद्धृत: #वेलेन्टाइन_डे_विशेष💝 सूर्यकुमार पांडेय की "यह लव-चतुर्दशी है!" शीर्षक कविता उनकी पुस्तक 'वाह! पांडे जी वाह!!' में भी संकलित है। 💝 आकांक्षा मिलन की, हर हृदय में बसी है। तितली संवर रही है, भौंरों में दिलकशी है। त्योहार प्रिय-मिलन का, बेचैन रूपसी है। चौदह फरवरी आई, यह ’लव-चतुर्दशी‘ है। 💝 यह पर्व है प्रणय का, सबसे नया-निराला। इस दिन खुली धरा पर, है ’लव‘ की पाठशाला। मस्ती का पाठ जारी, छलके है प्रेम-प्याला। है फूल की दुकां पर, हर इश्क करने वाला। 💝 है ’गिफ्ट‘ कोई देता, कोई ’गुलाब‘ लाया। कोई प्रिया को देने को ’कार्ड‘ ले के आया। वैरी जमाने ने था, पहरा कड़ा बिठाया। प्रेमी युगल जुगत कर, घर से निकल ही आया। 💝 मिलने को आशिकों ने, अपनी कमर कसी है। चौदह फरवरी आई, यह ’लव-चतुर्दशी‘ है। 💝 इस ’वेलंटाइन-डे‘ के, देखो नए नजारे। नयनों की झील में कुछ, डूबे नदी किनारे। हैं ब्याह की ललक में, सपने सभी कुंआरे। होने लगा है कुछ-कुछ, अब दिल में भी हमारे। 💝 ’एफएम‘ पे, रेडियो पे हैं प्रेम-धुन के गाने। हैं ’कॉलर-ट्यून‘ में भी, इस ’डे‘ के ही तराने। ऐसे में जवां दिल भी, माने तो कैसे माने? डैडी से कर रही है, लैला नए बहाने। 💝 जाए वो कैसे, संशय के ’जाम‘ में फंसी है। चौदह फरवरी आई, यह ’लव-चतुर्दशी‘ है। 💝 नजरों के हैं इशारे, ये सीन क्या ही दिलकश। ढेरों हसीन जोड़े, बतिया रहे हैं हंस-हंस। पार्कों में, होटलों में, बिखरा गुलाबी मधु-रस। जो मिल न पाए, करते वो ’व्हाट्सएप्प‘- ’एसएमएस‘। 💝 जय हो, तुम्हारी जय हो, हे संत वेलंटाइन। तुम आए तो उतरा है, ये वसंत वेलंटाइन। लव के सुमन खिले हैं दिग्दिगंत वेलंटाइन। होने लगा है मौसम रसवंत वेलंटाइन। 💝 हर पुष्प अब ’पुरुरवा‘, हर लता ’उर्वशी‘ है। चौदह फरवरी आई, यह ’लव-चतुर्दशी‘ है। 💝 है कौन यहां पर वह,जो प्यार नहीं करता। वह बात अलग है, वह इजहार नहीं करता। सच्चा मगर जो प्रेमी, दुनिया से नहीं डरता। लेकिन जमाना जालिम, स्वीकार नहीं करता। 💝 जालिम जमाने, ’लव‘ की डाली को यूं न काटो। पोथी मोहब्बतों की, दीमक न बन के चाटो। नफरत की खाइयों को, सद्भावना से पाटो। बूढ़ों को फूल भेंटो, बच्चों में प्यार बांटो। 💝 गर प्यार है जगत में, तब ही खुशी-हंसी है। चौदह फरवरी आई, यह ’लव-चतुर्दशी‘ है। ******* कवि- सूर्यकुमार पांडेय रचना वर्ष: 2008
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